Premanand ji Maharaj: गलत तरीके से कमाए धन से दान करने पर क्या होता है आप भी जान लें ?

वृंदावन के रसिक संत प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि गलत या अधर्म से कमाए धन से किया गया दान पुण्य नहीं देता, बल्कि पाप बढ़ाता है। शुद्ध कमाई, सच्ची भक्ति और राधा नाम जप से ही पाप नाश होता है। कलियुग में ईमानदारी और शुद्ध दान की महत्ता जानें। राधा राधा!

Dec 28, 2025 - 20:07
Dec 28, 2025 - 21:33
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Premanand ji Maharaj: गलत तरीके से कमाए धन से दान करने पर क्या होता है आप भी जान लें ?
प्रेमानंद जी महाराज: गलत तरीके से कमाए धन से दान करने पर क्या होता है? महाराज जी का स्पष्ट जवाब

Premanand ji Maharaj:- वृंदावन के प्रसिद्ध रसिक संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज (प्रेमानंद जी महाराज) अपने सत्संगों में बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि गलत या अधर्म से कमाए गए धन से किया गया दान पुण्यदायी नहीं होता। बल्कि, यह पाप को और बढ़ाता है तथा भगवान इसे स्वीकार नहीं करते।

कलियुग में धन कमाने के तरीके बदल गए हैं। कई लोग धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी, ठगी या अन्य अनैतिक साधनों से धन इकट्ठा करते हैं और सोचते हैं कि उससे मंदिर में चढ़ावा चढ़ाने, भंडारा कराने या दान देने से उनके पाप धुल जाएंगे और पुण्य मिलेगा। लेकिन प्रेमानंद जी महाराज शास्त्रों के आधार पर स्पष्ट कहते हैं कि ऐसी धारणा पूरी तरह गलत है।

महाराज जी समझाते हैं कि दान की पुण्यता पूरी तरह धन की शुद्धता पर निर्भर करती है। जैसे चोरी का सामान भगवान को चढ़ाने से वे प्रसन्न नहीं होते, उसी तरह गलत कमाई का दान व्यर्थ है। शास्त्रों में कहा गया है कि दान तभी फलदायी होता है जब वह ईमानदारी की मेहनत से अर्जित धन से किया जाए। अधर्म से कमाया धन पाप का फल है, और उससे दान करने पर पाप कम होने की बजाय बढ़ जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई चोरी का सोना मंदिर में दान कर दे, तो क्या भगवान उसे स्वीकार करेंगे? बिल्कुल नहीं! ऐसा दान भगवान का अपमान है और कर्मों के बंधन को मजबूत बनाता है। भले दान लेने वाले को लाभ हो, लेकिन दान करने वाले को पुण्य नहीं मिलता।

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प्रेमानंद जी महाराज भगवद्गीता और मनुस्मृति आदि शास्त्रों का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि दान की शुद्धता के मुख्य आधार हैं:

  • दाता की शुद्धता (सच्चा मन और श्रद्धा),
  • धन की शुद्धता (ईमानदारी से कमाया गया),
  • प्राप्तकर्ता की शुद्धता (सुपात्र व्यक्ति)।

यदि धन ही अपवित्र है, तो दान से पाप नहीं मिटता। कलियुग में लोग सोचते हैं कि दान से सब पाप खत्म हो जाते हैं, लेकिन भगवान हर कर्म का बारीक हिसाब रखते हैं। सच्चा दान वही है जो शुद्ध कमाई और निष्काम भाव से किया जाए – वही जीवन में सुख और पुण्य लाता है।

यदि किसी ने गलत तरीके से धन कमाया है, तो महाराज जी सलाह देते हैं:

  • सच्चे मन से पश्चाताप करें।
  • उस धन को सही जगह वापस करें या जरूरतमंदों को दें, लेकिन पुण्य की उम्मीद न रखें।
  • भविष्य में ईमानदार मार्ग अपनाने का संकल्प लें।
  • सबसे बड़ा उपाय: राधा नाम का जप। सच्चे हृदय से 'राधा-राधा' जप करने से पाप जलकर राख हो जाते हैं।

महाराज जी का संदेश बहुत स्पष्ट है: सच्ची भक्ति, शुद्ध कर्म और राधा नाम जप से ही मन पवित्र होता है। गलत धन की चिंता छोड़कर राधा नाम में लीन हो जाइए – भगवान स्वयं सभी आवश्यकताएं पूरी कर देंगे। गलत कमाई का दान पुण्य नहीं देता, बल्कि कर्मबंधन बढ़ाता है।

ये शिक्षाएं हमें याद दिलाती हैं कि ईमानदारी, पश्चाताप और सच्ची भक्ति ही जीवन को पुण्यवान बनाती हैं। कोई भूल हो जाए तो पश्चाताप करें और सत्पथ पर चलें – भगवान की कृपा जरूर मिलेगी।

नोट: यह जानकारी प्रेमानंद जी महाराज के सत्संगों और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। विस्तृत समझ के लिए उनके मूल प्रवचन सुनें या शास्त्रों का अध्ययन करें।

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