Premanand ji Maharaj: देर तक सोने से जीवन में आते हैं ये भयंकर नुकसान
परम पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज अपने प्रवचनों में बार-बार एक बात पर जोर देते हैं कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका आलस्य है,
Premanand ji Maharaj: परम पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज अपने प्रवचनों में बार-बार एक बात पर जोर देते हैं कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका आलस्य है, और आलस्य का सबसे बड़ा लक्षण है देर तक सोना। महाराज जी कहते हैं, “जो व्यक्ति सूर्योदय के बाद भी सोया रहता है, वह सोते-सोते अपना भाग्य, अपना स्वास्थ्य और अपनी आत्मशक्ति तीनों खो देता है।”
हमारे शास्त्र, वेद, उपनिषद, पुराण और सभी संत-महात्मा एक स्वर से कहते हैं कि ब्राह्म-मुहूर्त (सुबह ३:३० से ५:३० बजे तक का समय) इस संसार का सबसे पवित्र, सबसे शक्तिशाली और सबसे ऊर्जावान समय है। इस समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा सबसे अधिक होती है, ओजोन की परत पृथ्वी के सबसे निकट होती है, और सूर्य की प्रथम किरणें जब धरती पर पड़ती हैं तो उनमें एक विशेष प्रकार की दिव्य शक्ति होती है जिसे हमारे ऋषियों ने “विश्व-प्राण” कहा है।
पर जब हम देर तक सोते हैं, घने परदों के पीछे, ए.सी. की ठंडक में, तो हम इस अनमोल खजाने से खुद को वंचित कर लेते हैं। महाराज जी ने बहुत करुणा के साथ समझाया है कि देर तक सोने की यह छोटी-सी लगने वाली आदत धीरे-धीरे हमारे जीवन से तीन सबसे कीमती चीजें छीन लेती है। आइए एक-एक करके इन तीनों नुकसानों को विस्तार से समझें।
पहला बड़ा नुकसान – चेहरे का प्राकृतिक तेज और कान्ति खो जाती है
हमारे शरीर की हर कोशिका सूर्य की किरणों से पोषण पाती है। सूर्य का प्रकाश विटामिन-D का सबसे बड़ा स्रोत है, जो हमारी त्वचा, हड्डियों और बालों के लिए अमृत के समान है। सुबह ६ बजे से पहले की सूर्य-किरणें अल्ट्रा-वायलेट किरणों से मुक्त होती हैं और उनमें इन्फ्रा-रेड किरणें अधिक होती हैं जो शरीर को गर्माहट और नई ऊर्जा देती हैं।
जब हम सूर्योदय के बाद ८-९ बजे उठते हैं तो ये स्वर्णिम किरणें हम तक नहीं पहुँच पातीं। परिणामस्वरूप हमारी त्वचा बेजान, रूखी और मुरझाई हुई दिखने लगती है। महाराज जी कहते हैं, “जिस व्यक्ति का चेहरा उदास और बुझा हुआ दिखता है, समझ लो उसने सूर्य भगवान का अपमान किया है।”
ऐसे लोग महंगे-महंगे फेशियल, क्रीम, सैलून पर लाखों रुपए खर्च करते हैं, पर चेहरे पर वह प्राकृतिक निखार नहीं आता जो एक साधारण व्यक्ति को ब्राह्म-मुहूर्त में उठकर सूर्य-नमस्कार करने से मिल जाता है। महाराज जी ने एक बार हास्य के साथ कहा था, “क्रीम लगाने से चेहरा नहीं चमकता, सूर्य को प्रणाम करने से चमकता है।”
दूसरा बड़ा नुकसान – शरीर की चुस्ती, ताजगी और आकर्षण समाप्त होने लगता है
सुबह का समय प्रकृति का सबसे शुद्ध और सात्विक समय है। इस समय वातावरण में नकारात्मक आयनों (Negative Ions) की मात्रा सबसे अधिक होती है जो हमारे फेफड़ों में जाकर रक्त को शुद्ध करते हैं। जब हम देर तक सोते हैं तो यह शुद्ध वायु हमारे शरीर में प्रवेश नहीं कर पाती।
फलस्वरूप पूरे दिन शरीर में एक अजीब-सा भारीपन, सुस्ती और थकान बनी रहती है। पाचन तंत्र कमजोर पड़ने लगता है, गैस, कब्ज, एसिडिटी जैसी छोटी-छोटी बीमारियाँ घर कर लेती हैं। महाराज जी कहते हैं, “जो व्यक्ति सुबह देर से उठता है, उसका शरीर दिनभर बोझ ढोता है, जबकि जो ब्राह्म-मुहूर्त में उठता है, उसका शरीर दिनभर उड़ता है।”
शरीर का आकर्षण भी खोने लगता है। कंधे झुकने लगते हैं, चाल सुस्त पड़ जाती है, आवाज में ओज नहीं रहता। लोग कहते हैं, “क्या बात है, आज तुम कुछ उदास लग रहे हो?” जबकि व्यक्ति को पता भी नहीं होता कि उसकी यह उदासी देर तक सोने की वजह से है।
तीसरा और सबसे भयंकर नुकसान – आत्मविश्वास, कर्मठता और जीवन की गति कमजोर पड़ने लगती है
सुबह देर से उठने वाला व्यक्ति दिन की शुरुआत ही हारा हुआ करके करता है। उसका मन कहता है, “अरे अभी तो ९ बज गए, अब क्या होगा?” फिर जल्दबाजी में नहाना, नाश्ता करना, ऑफिस के लिए भागना – पूरा दिन एक दौड़ बन जाता है। समय पर कुछ नहीं होता। धीरे-धीरे उसकी निर्णय लेने की शक्ति कमजोर पड़ने लगती है।
महाराज जी बताते हैं कि ब्राह्म-मुहूर्त में उठने वाले व्यक्ति को दिन में दो-तीन घंटे अतिरिक्त मिल जाते हैं। ये घंटे वह अपने लिए उपयोग करता है – थोड़ा जप, थोड़ा ध्यान, थोड़ा व्यायाम, थोड़ा पढ़ना। इन दो-तीन घंटों में वह अपने जीवन की दिशा तय कर लेता है। जबकि देर से उठने वाला व्यक्ति पूरा दिन दूसरों के पीछे भागता रहता है।
ऐसे लोग अक्सर कहते हैं, “मुझे समय ही नहीं मिलता।” जबकि सच्चाई यह है कि वे अपना सबसे कीमती समय सोते हुए व्यर्थ गँवा देते हैं। धीरे-धीरे इनकी सोचने-समझने की शक्ति, नई चीजें सीखने की क्षमता और चुनौतियों का सामना करने का हौसला कमजोर पड़ने लगता है।
महाराज जी का दिव्य उपाय – सिर्फ २१ दिन का संकल्प
परम पूज्य महाराज जी कहते हैं, “बस २१ दिन का संकल्प लो। २१ दिन तक चाहे जो हो जाए, सूर्योदय से पहले उठो। पहले दिन मुश्किल लगेगा, दूसरे दिन भी, पर सातवें दिन से शरीर खुद जागने लगेगा। २१ दिन बाद तुम्हें खुद पता चलेगा कि तुम पहले कहाँ थे और अब कहाँ पहुँच गए हो।”
उठते ही सबसे पहले खाली पेट दो गिलास गुनगुना पानी पियो, फिर खुले आसमान के नीचे खड़े होकर सूर्य भगवान को प्रणाम करो। दोनों हाथ जोड़कर ११ बार यह मंत्र बोलो :
ॐ मित्राय नमः ॐ रवये नमः ॐ सूर्याय नमः ॐ भानवे नमः ॐ खगाय नमः ॐ पूष्णे नमः ॐ हिरण्यगर्भाय नमः ॐ मरीचये नमः ॐ आदित्याय नमः ॐ सवित्रे नमः ॐ अर्काय नमः ॐ भास्कराय नमः
इसके बाद १२ बार सूर्य नमस्कार करो, या कम से कम १० मिनट टहलो। फिर थोड़ी देर राधा-नाम का जप करो। बस इतना कर लो, महाराज जी कहते हैं, “फिर देखो तुम्हारा जीवन कैसे चमकने लगता है।”
अंत में महाराज जी का हृदय-स्पर्शी संदेश
“बेटा, यह शरीर भगवान ने हमें साधन के लिए दिया है, भोग के लिए नहीं। जो व्यक्ति सुबह उठकर सूर्य भगवान को प्रणाम करता है, उसे सूर्य भगवान पूरा दिन ऊर्जा देते हैं। और जो सोया रहता है, वह सूर्य भगवान का अपमान करता है, और अपमान करने वाले का कभी कल्याण नहीं होता।”
“सुबह उठो, सूर्य को प्रणाम करो, राधा-नाम लो, फिर देखो दुनिया की कोई ताकत तुम्हें हरा नहीं सकती।”
तो आइए, आज रात ही संकल्प लें। कल सुबह जब पहली किरण निकले, हम सब सूर्य भगवान के सामने खड़े होंगे। हमारे चेहरे पर कान्ति होगी, शरीर में चुस्ती होगी, और हृदय में राधा-राधा का संगीत गूंजेगा।
एक सच्ची घटना जो महाराज जी ने सुनाई
एक युवक बहुत परेशान था – नौकरी नहीं मिल रही थी, चेहरा बुझा हुआ था, आत्मविश्वास खत्म हो चुका था। महाराज जी ने सिर्फ एक बात कही – “बेटा, २१ दिन सूर्य से पहले उठना, सूर्य को प्रणाम करना और राधा-राधा जपना। बस।”
उसने संकल्प लिया। पहले ३-४ दिन बहुत कठिन लगे। पर सातवें दिन कुछ जादू हुआ – सुबह ३:५० बजे उसकी आँखें खुद खुल गईं। उसने सूर्य नमस्कार किया, राधा-नाम लिया। २१वें दिन वह इंटरव्यू देने गया। इंटरव्यूअर ने पूछा, “आपमें ऐसा क्या खास है?” वह मुस्कुराया और बोला, “मेरे भीतर सूर्य और राधा दोनों विराजमान हैं।” उसे उसी दिन जॉब मिल गई – और वह भी सबसे ऊँचा पैकेज!
महाराज जी का दिव्य आह्वान – आज रात ही संकल्प लो!
“बेटा, आज रात सोने से पहले अपने तकिए के नीचे एक कागज रखना। उस पर लिखना – ‘कल सुबह मैं सूर्य से पहले उठूँगा। मैं अपना भाग्य जगाने जा रहा हूँ। राधा-राधा… जय सूर्य नारायण!’
फिर अलार्म लगाकर सो जाना। जब सुबह अलार्म बजेगा, तो सबसे पहले मुस्कुराना और बोलना – ‘राधे-राधे! आज मेरा नया जन्म है!’
और फिर उठकर देखना… तुम्हारे जीवन में ऐसा प्रकाश आएगा कि तुम खुद हैरान रह जाओगे!”
अंतिम पंक्तियाँ जो महाराज जी ने गाते हुए कहीं
“उठ जा रे प्राणी, अभी समय है बाकी, सूर्य से पहले उठ, बन जा जीवन का साक्षी। राधा नाम ले ले, सूरज को प्रणाम कर ले, फिर देख, तेरी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी एक झटके में!”
तो आओ… आज से… अभी से… हम सब मिलकर संकल्प लें –
“हम सूर्य से पहले उठेंगे, हम अपना तेज वापस लेंगे, हम अपना आत्मबल जगाएँगे, हम राधा-राधा जपते हुए दुनिया को जीत लेंगे!”
जय सूर्य देव! 🌞 जय श्री राधे-राधे!! 🌸🙏 परम पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज की जय हो! ❤️
(यह लेख पढ़ते-पढ़ते आपका मन खुद कह रहा होगा – “कल सुबह… मैं जरूर उठूँगा!” तो अभी फोन उठाओ… अलार्म लगाओ… और कमेंट में लिख दो – “मैं कल सूर्य से पहले उठूँगा – राधे-राधे!”)
आपका कल… आपका सबसे सुनहरा दिन होने वाला है!
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